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संसद का मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र

विषय- राजव्यवस्था

स्रोत- द हिंदू

संदर्भ

  • सरकार ने संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू भी संबंधित सदनों के नेताओं से मुलाकात करेंगे।

संविधान क्या कहता है?

  • अनुच्छेद 85 के अनुसार संसद के दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतराल नहीं होना चाहिए।
  • कृपया ध्यान दें, संविधान यह निर्दिष्ट नहीं करता है कि संसद की बैठक कब या कितने दिनों के लिए होनी चाहिए।
  • संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतराल छह महीने से अधिक नहीं हो सकता। यानी साल में कम से कम दो बार संसद की बैठक होनी चाहिए।
  • संसद का ‘सत्र’ किसी सदन की पहली बैठक और उसके सत्रावसान के बीच की अवधि है।

संसदीय सत्र क्यों महत्वपूर्ण है?

  • कानून बनाना इस बात पर निर्भर करता है कि संसद की बैठक कब होती है।
  • साथ ही, सरकार के कामकाज की गहन जांच और राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श तभी हो सकता है जब दोनों सदन सत्र में हों।
  • संसद के कामकाज में भविष्यवाणी (Predictability) एक सुचारू रुप से काम कर रहे लोकतंत्र की कुंजी है।

सत्र कौन बुलाएगा?

  • व्यवहारिक तौर पर, संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति, जिसमें वरिष्ठ मंत्री शामिल होते हैं, संसद की बैठक की तारीखें तय करती हैं और फिर इससे राष्ट्रपति को अवगत कराते हैं।
  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कार्यकारिणी, जो संसद के कार्य को संचालित करती है, उसके पास राष्ट्रपति को विधायिका को बुलाने की सलाह देने की शक्ति होगी।

 


 

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